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‘ हिंदी दिवस ‘

' हिंदी दिवस '

 

 

 

 

 

हिन्दी  भाषा से  ही बनती  भारत की  पहचान है
भारत माँ के शुभ्र भाल की अमिट निराली शान है।

तोड़ गुलामी की जंजीरें इसने आज़ादी दिलवाई थी
आज़ादी के परवानो की इसने ही अलख जगाई थी
हर जन जन के चेहरे की यह मधुर मधुर मुस्कान है।
भारत माँ के शुभ्र भाल की अमिट निराली शान है।

तेरे  प्यार में  खिल  उठती  है  और कई  भाषाएँ
शब्दों को मिल जाती है  कई क्षेत्रीय नई दिशाएँ
जीवन रेखा के समान तू  और  राष्ट्र  की  जान है।
भारत माँ के शुभ्र भाल की अमिट निराली शान है।

भारतीय संस्कृति का इसमें छिपा हुआ है खज़ाना
हिन्दी  अपनाने से  मिलता खुशियों का नज़राना
तेरे आंचल में मिल जाए  शीतल सुख की छांव है।
भारत माँ के शुभ्र भाल की अमिट निराली शान है।

सुर कबीर तुलसी मीरा ने तुझको ही अपनाया था
भक्ति रस  के गीतों से सबने  तुमको पहचाना था
तेरा अमृतमई सानिध्य ही  सर्व सुखों की खान है।
भारत माँ के शुभ्र भाल की अमिट निराली शान है।

नीले  अंबर पर ध्वज तेरा  सदा  सदा लहराएगा
भारत का हर एक नागरिक तेरा ही गुण गाएगा
माँ समान तू है अति प्यारी तू मेरा स्वाभिमान है।
भारत माँ के शुभ्र भाल की अमिट निराली शान है।

मन  उपवन  के पुष्प सदा ही तुझे देख मुस्काते हैं
तुझ संग बातें कर लेने से हृदय कमल खिल जाते है
भारत के सीने का दिल है हम सब तुझपे कुर्बान है।
भारत माँ के शुभ्र भाल की अमिट निराली शान है।

हिन्दी  भाषा से  ही बनती  भारत की  पहचान है
भारत माँ के शुभ्र भाल की अमिट निराली शान है।

' हिंदी दिवस '  कमल

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