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हर हाल में जिला नारनौल ही रहे: किशन चौधरी

हर हाल में जिला नारनौल ही रहे: किशन चौधरी

नारनौल अग्रवाल सभा में पत्रकारों से बातचीत करते नगर परिषद के पूर्व प्रधान किशन चौधरी।
-सीएम, केन्द्रीय मंत्री व मंत्री को भेजा ज्ञापन.
नारनौल,24जनवरी,2021:   :  जिला मुख्यालय का संचालन नारनौल से ही करने की मांग को लेकर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन अधिवक्ता किशन चौधरी ने अग्रवाल सभा में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया।
प्रेसवार्ता में अधिवक्ता किशन चौधरी ने पूर्व में जिला मुख्यालय नारनौल में बनाने के मुख्य बिंदुओं का एक ज्ञापन मुख्यमंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह व राज्यमंत्री ओमप्रकाश नाम ऑनलाइन भेजा। इस ज्ञापन में कुछ ऐसे तथ्य रखे गए जिनके आधार पर सदा से ही नारनौल जिला मुख्यालय रहा है। ज्ञापन में दिए मुख्य बिंदु में बताया कि महाभारत काल में राष्ट्र के नाम से जाने वाला नारनौल महर्षि च्यवन की तपोस्थली आर्चीक पर्वत जिससे कालांतर में ढोसी के नाम से जाना जाता है का इतिहास में बार-बार उल्लेख दर्शाता है कि नारनौल हर युग में कालजयी रहा हैं।

मुगल काल में नारनौल में सिक्कों की टकसाल का होना व बाबर द्वारा लिखित बाबरनामा में नारनौल के वैभव के दर्शन कराना बताता है कि नारनौल शासकों की शक्ति का केंद्र रहा है। महाराजा पटियाला के शासन काल में यहां कचेहरी का निर्माण हुआ तथा गुरूग्राम, रेवाड़ी, बावल व महेंद्रगढ़ आदि दूर दूर के क्षेत्रों का इस कचेहरी के अंतर्गत आना मुख्य बिंदु है।

दूसरे लाला बहादुर सिंह नूनी वाला की हवेली में उनके खजाने का यहां होना भी विचारणीय है। आजादी के उपरांत सन 1948 में राज्य के गठन के दौरान पटियाला रियासत से महेंद्रगढ़, जींद से दादरी व नाभा रियासत से बावल को मिलाकर एक जिले का गठन किया गया। जिसका जिला मुख्यालय नारनौल बना। आजाद भारत में नियुक्त पहले जिला उपायुक्त आरएस पलटा ने अपना कार्यालय नारनौल में स्थापित किया तब से उपायुक्त कार्यालय का संचालन केंद्र नारनौल ही है।

1966 में हरियाणा गठन के समय जब 7 जिले अस्तित्व में आए थे तब भी जिले की संचालन प्रक्रिया जिला मुख्यालय नारनौल से ही क्रियान्वित करना तत्कालीन प्रशासन ने उचित समझा। पर्यटन की दृष्टि से देखें तो जल महल, नारनौल जनपद के निर्माता महाराजा लूणकरण की देवी मां चामुंडा देवी जी का प्राचीन किले पर विराजमान भव्य मंदिर, शेरशाह सूरी का मकबरा, बीरबल का छत्ता, पीर तुर्कमान का मकबरा, चोर गुंबद, तखत वाली बावड़ी आदि मौजूद हैं। यहां तक कि जिले में चारों विधानसभा का मध्य क्षेत्र नारनौल ही आता है जिससे कि प्रशासन को पूरे जिले में व्यवस्था बनाने में आसानी रहती है। उन्होंने कहा कि सभी नारनौल वासी चाहते हैं कि जिला मुख्यालय हर हाल में नारनौल ही बना रहे।
इस अवसर पर समाजसेवी सूरज बोहरा, नरसिंह दायमा, सरदार गुरमेल सिंह, केशव संघी, शुभम कंछल, मनीष गुप्ता, रामगोपाल अग्रवाल, मुकेश, सरदार सुरजीत अरोड़ा व नितिन चौधरी सहित अनेक लोग उपस्थित थे ( बी.एल. वर्मा ).

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