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हकेंवि ने विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए किया एमओयू

हकेंवि ने विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए किया एमओयू
-विद्यार्थियों को मिलेगा ई-वेस्ट प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण
त्रिभुवन वर्मा द्वारा :
महेन्द्रगढ़23 मई 2019 :हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के दीन दयाल उपाध्याय कौशल केंद्र के तहत संचालित औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन (इंडस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट) विभाग तथा देशवाल वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, गुरूग्राम के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। विश्वविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार राम दत्त तथा कम्पनी की ओर से उपाध्यक्ष श्री राकेश कुमार ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू में शैक्षणिक शोध, ई-वेस्ट प्रबंधन से जुड़ी तकनीक, व्याख्यान, विद्यार्थियों को प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध करवाने जैसे विषयों पर आपसी सहमति बनी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर.सी. कुहाड़ भी उपस्थित रहे और उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराने के लिए कम्पनियों के साथ यह साझेदारी अवश्य ही लाभदायक होगी। कुलपति ने इस प्रयास पर खुशी जाहिर की और कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए जारी यह प्रयास अवश्य ही उनके बेहतर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
इस बारे में जानकारी देते हुए दीनदयाल उपाध्याय कौशल केंद्र के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. पवन कुमार मौर्य ने बताया कि उनके विभाग में औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों को विषय की बारीकियों से अवगत कराने के लिए इस क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न कम्पनियों के साथ एमओयू किए जा रहे हैं।
इंडस्ट्रीयल वेस्ट मैनेजमेंट विभाग के प्रभारी डा. अनूप यादव ने बताया कि एमओयू का उद्देश्य संबंधित कम्पनी के साथ मिलकर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिलवाना, कौशल विकास को बढ़ावा देना तथा ई-वेस्ट के क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों से अवगत करवाना है। उन्होंने बताया कि कौशल विकास हेतु विभाग ने स्किल काउंसलिंग फार ग्रीन जाब्स, भारत सरकार के साथ संबद्ध है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्रीराम दत्त ने कम्पनी के अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि मुझे विश्वास है कि कम्पनी और विश्वविद्यालय मिलकर ई-वेस्ट प्रबंधन के क्षेत्र में नए शोध तथा भविष्य में रोजगार के नए अवसरों का सृृजन करेंगे। देशवाल वेस्ट मैनेजमेंट के उपाध्यक्ष राकेश कुमार ने एमओयू के लिए विश्वविद्यालय का आभार प्रकट करते हुए हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को ई-वेस्ट से जुड़ी विभिन्न समस्याओं जैसे ई-वेस्ट का पुन:चक्रण तथा उचित निपटान व होने की बातों से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में लगभग 3.6 मिलियन टन ई-वेस्ट पैदा होता है तथा उसका के केवल 5 प्रतिशत ही पुन:चक्रण उचित प्रणाली तथा 95 प्रतिशत गलत ढ़ंग से किया जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप विभिन्न प्रकार की बीमारियां तथा पर्यावरणीय समस्याएं पैदा होती जा रही है। कार्यक्रम के अंत में डा. सुषमा यादव ने विभाग की ओर आए हुए अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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