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*सियान जनशाला में वरिष्ठ नागरिकों से बच्चें रूबरू होकर लेंगे अनुभव का लाभ*

*सियान जनशाला में वरिष्ठ नागरिकों से बच्चें रूबरू होकर लेंगे अनुभव का लाभ*
*-जन पहल चैपाल में स्कूल में शिक्षा को बेहतर करने के लिए होगी आम जनता से शिक्षकों की चर्चा*
*- 5 नवाचारों पर होगा दुर्ग जिले में कार्य, कलेक्टर ने दिये निर्देश*
दुर्ग /बुजुर्गों के अनुभवों का लाभ अब बच्चे लेंगे, इसके लिए गाँव और शहरों के वरिष्ठ नागरिकों के साथ बच्चे हर दिन होंगे रूबरू। उनके सुदीर्घ जीवन के किस्से सुनेंगे, उनके अनुभव से सीखेंगे। अपनी तरह का यह पहला नवाचार दुर्ग जिले में होगा। अपने अनुभवों की विरासत जिले के वरिष्ठ नागरिक बच्चों तक संप्रेषित करेंगे। कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने आज शिक्षा विभाग की बैठक में इस नवाचार पहल की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही चार अन्य नवाचार पहल शिक्षा विभाग द्वारा किये जाएंगे। इन प्रयोगों में उत्थान, सियान जनशाला, शिक्षक प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम-‘‘प्रतिभा‘‘, जन पहल, आंतरिक समीक्षा मिशन (आई.आर.एन.)’’ शामिल हैं। इनके बारे में विस्तार से जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रवास सिंह बघेल ने दी। बैठक में कलेक्टर ने कक्षाओं के अलावा साप्ताहिक टेस्ट एवं अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में अपर कलेक्टर सुश्री नूपुर राशि पन्ना, सहायक कलेक्टर श्री हेमंत नंदनवार एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
*सियान जनशाला-* हमारी परंपरा में बुजुर्गों के ज्ञान की विरासत का बड़ा महत्व है। कालिदास ने मेघदूतं में कोविद ग्राम वृद्धाः का जिक्र किया है। गाँव के बुजुर्ग भले ही पढ़े लिखे हों या न हो, अपने अनुभव की वजह से वे आदरणीय है और इनसे ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। जर्मनी के एकीकरण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले बिस्मार्क का कथन था कि वे मूर्ख हैं जो अपनी गलतियों से सीखते हैं मैं दूसरों की गलतियों से सीखना पसंद करता हूँ। सियान शाला के इस नवाचार के माध्यम से न केवल बच्चे बुजुर्गों से ज्ञान की बातें सीख पायेंगे अपितु उस परंपरागत ज्ञान को भी प्राप्त कर पाएंगे जो किताबों में नहीं मिलती लेकिन सदियों से पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होती है।
*उत्थान-* पढ़ाई के साथ ही सीखने को फोकस करते हुए उत्थान का नवाचार आरंभ किया जाएगा। इसमें लर्निंग कार्नर और पुस्तकालय बनाये जाएंगे। यह प्राथमिक शाला के बच्चों के लिए होगा। छोटे बच्चों में रीडिंग हैबिट विकसित करने के लिए सुंदर चित्रमय पुस्तकें लाइब्रेरी में रखी जाएंगी ताकि बच्चों का स्वाभाविक रूझान अच्छे बाल साहित्य की ओर हो सके। इसके अलावा लर्निंग कार्नर भी खोला जाएगा, जहाँ विभिन्न तरीकों से विज्ञान के रहस्यों के बारे में और अन्य चीजों के बारे में प्रयोग के माध्यम से सिखाया जाएगा।
*जन पहल-* बच्चों को गढ़ने में स्कूल की बड़ी भूमिका होती है। यदि जनसमुदाय अपने नजदीकी स्कूलों की गतिविधियों में रुचि बढ़ाये तो उनके फीडबैक से स्कूल और बेहतर कर सकते हैं। साथ ही शिक्षकों को भी पेरेंट्स एवं जनसमुदाय के सहयोग की जरूरत होती है क्योंकि स्कूल से इतर वे अपना समय मोहल्लों में ही बिताते हैं। जनचैपाल में स्कूलों में व्यवस्था और इसे बेहतर करने के बारे में चर्चा होगी। इससे स्कूलों के प्रति जनसमुदाय का लगाव और बढ़ेगा।
*शिक्षक प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम-* यह देखा गया है कि कई शिक्षक बहुत रुचि से बच्चों को पढ़ाते हैं। इनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने से उनका उत्साह और बढ़ता है। शिक्षा विभाग ऐसे शिक्षकों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने शिक्षक प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम रखेगा।
*आंतरिक समीक्षा मिशन (आईआरएम)-* किसी चीज को बेहतर करने के लिए आंतरिक समीक्षा बेहद जरूरी होती है। आंतरिक समीक्षा मिशन बहुत सारे बिन्दुओं पर शिक्षकों एवं विभागीय अधिकारियों के कार्यों की समीक्षा करेगा। इसके लिए कलेक्टर ने बैठक में निर्धारित बिन्दुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा इसके अनुरूप प्रारूप तैयार करने के निर्देश दिये।
मोनिका शर्मा
रायपुर

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