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*विश्वास*

*विश्वास*

मेरा  प्यार  है  पर्वत  जैसा
अडिग कभी  न हिलने  वाला
हौसला और विश्वास भरा दिल
कभी    नहीं  अब गिरने    वाला।

सीने  के  पर्वत  के  रहते
पत्थर मिट्टी  और  कंकर
हिम शिखरों पर मिल जाते है
बम बम भोले  भवानी  शंकर।

पर्वत  की  शृंखलाओं  से
निर्मल  निर्झर  बहते  रहते
वनस्पतियां और कई जीवन
रहकर  उसमें  पलतें  बढ़ते।

सीख लिया मैंने पर्वत से
शीश  उठाकर  जीना है
स्वाभिमान  और हिम्मत से
जीवन    अमृत  पीना  है।

शंकर  ने    विषपान  किया
जग को जीवन  वरदान दिया
प्रेम तपस्या और  समर्पण
सारे  जग  ने  पहचान लिया।

मीनाक्षी
जालंधर

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