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*रंग बदलती है ये दुनिया  *

*रंग बदलती है ये दुनिया  *

बीच भंवर में फंसे हुए हैं,
न कोई साथ खेवैया,
किस पर अब विश्वास करें,
रंग बदलती है ये दुनिया।
सारे रिश्ते नाते देखें,
और देखे संसार के रंग,
मोह माया के जाल में उलझे,
उड़ी मेरे नयनों से निंदिया।
प्रेम दया ममता को भूले,
पत्थर जैसे बन गए लोग,
दिया जला कर ढूंढता फिरता,
मिल जाए कोई मन बसिया।
स्वार्थ की आंधी में उड़ गए,
कागज की तरह सब लोग,
सांसारिक चक्र में ऐसे उलझे,
प्रीत की भूल गए प्रक्रिया।
न जाने क्या है घिस जाता,
बोले अगर दो मीठे बोल,
जीने का अंदाज न सीखा,
बहुत सी रह गई कमियां।
भाग रहे सब किसी दौड़ में,
न जाने किस चाहत में,
चैन मिला न सुख पाया,
ये संसार है भूल भुलैया।

जीवन के अवरोधों का अब,
असर नहीं मुझ पर होगा,
सीख लिया अब मैंने बहना,
जैसे बहती जाए नदिया।
*रंग बदलती है ये दुनिया  * कमल
जालंधर

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