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बज़्म-ए-ग़ज़ल में चला ग़ज़लों का दौर

बज़्म-ए-ग़ज़ल में चला ग़ज़लों का दौर
चण्डीगढ़: भण्डारी अदबी ट्रस्ट (रजि.) की ओर से आज गाँधी स्मारक भवन के सभागार में बज़्म-ए-ग़ज़ल का आयोजन किया गया।इसमें ट्राईसिटी के लगभग सभी ग़ज़लकारों ने भाग लिया। मुख्यअतिथी के रूप में  प्रो॰ सौभाग्य वर्धन (निर्देशक, उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र) ने शिरकत की । अध्यक्ष मण्डल में प्रख्यात शायर श्री सिरी राम ‘अर्श’ , अशोक नादिर, प्रेम विज, शामिल थे।
इस अवसर पर अशोक नादिर की पुस्तक ‘ग़ज़ल’ का विमोचन किया गया। गाँधी स्मारक निधी ने प्रो॰ सौभाग्य वर्धन जी को एवं डॉ॰ विनोद शर्मा जी को सम्मानित किया।
कार्यक्रम के आरम्भ में अशोक नादिर ने अपनी ग़ज़ल तरन्नुम में पेश करते हुए कहा :
“नज़र नज़र से चुरा रहे हैं
सितम वो हमपे यूं ढा रहे हैं”
प्रो॰ सौभाग्य वर्धन जी ने फ़रमाया:
“चोट जब दुःखती है तो आंसू छलक आते हैं
वैसे तो दर्द मेरे दिल में पड़ा रहता है
मुझको है होश कहाँ इतना कि उसे सुन लूँ
ऐसी बेहोशी में इक चैन बना रहता है
प्रेम विज जी ने फ़रमाया :
“वक़्त की बस यही तो मंज़िल है
दिन निकलता है रात होती है
शम्स तबरेज़ी अपने विचार यूं रखे:
“मेरे सवाल के ऐसे भी कुछ जवाब हुए
गुनाह मैने किये और उसे ईताब हुए
डॉ॰ विनोद शर्मा जी ने अपने ख़्याल कुछ ऐसे रखे:
“प्रेम के बीज है जो भी बोता
चैन की नींद वो ही है सोता”
श्रीमती नीरू मित्तल जी ने फ़रमाया:
“खुश रहो तुम,खिलखिलाते ही रहो
बलबीर ‘तन्हा’ जी ने अपने अल्फ़ाज़ कुछ ऐसे बयां किये:
“सिलसिला साँसों का ये चलता है तब
जब किसी ढाँचे में दिल ढलता है तब”
महफ़िल में शायरा गुरदीप ‘गुल’, ईशा नाज़, सुखविंदर आही,रश्मि शर्मा, पवन मुन्तज़िर,बबिता कपूर,डॉ जतिन्दर परवाज़, डॉ अय्यूब खान, राजवीर राज, सुरजीत धीर, आरती प्रिया, शहनाज़ भारती, नीरज रायज़ादा एवं सतरजीत शर्मा जी ने शिरक़त कर के वाह वाही लूटी । आख़िर में गाँधी स्मारक निधी के अध्यक्ष श्री देवराज त्यागी जी ने सभी आए बुद्धिजनों का धन्यवाद् किया।
YS.Rana: Principal Correspondent.

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