Home » पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय ने ‘ब्रेन एट रिस्क’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया
Hindi News

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय ने ‘ब्रेन एट रिस्क’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया

 

पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय ने 'ब्रेन एट रिस्क' विषय पर वेबिनार का आयोजन किया

बठिंडा  25 नवंबर 2020    : पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा (सीयूपीबी) ने कुलपति प्रो. राघवेंद्र पी. तिवारी के संरक्षण में “ब्रेन एट रिस्क” विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया। हैदराबाद के के.आई.एम.एस. अस्पताल में वरिष्ठ सलाहकारडॉ. सुभाष कौल, एम.डी., डी.एम. (न्यूरोलॉजी) इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे।

कार्यक्रम की शुरुआत डीन रिसर्च प्रो. अंजना मुंशी द्वारा स्वागत भाषण के साथ हुई, जहाँ उन्होंने वेबिनार के विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. सुभाष कौल ने निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हैदराबाद के संकाय के रूप में 27वर्षों तक अपने सेवाएं दी है और उन्होंने राष्ट्रीय/ अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में लगभग 120 शोध प्रकाशन प्रकाशित किए हैं। उन्होंने कहा, डॉ. कौल इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के पूर्व अध्यक्ष हैं और अपने पेशेवर जीवन के दौरान कई प्रतिष्ठित पदों को संभाला है।

मुख्य वक्ता डॉ. सुभाष कौल ने बताया कि मानव मस्तिष्क समय के साथ विकसित हुआ है। उन्होंने कहा, मस्तिष्क हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है जो आधुनिक जीवन शैली में अहम भूमिका निभाता है और हमें इसे संरक्षित करने के लिएकदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लगभग हर व्यक्ति को जन्म के समय एक स्वस्थ मस्तिष्क मिलता है, लेकिन जीवन के दौरान मानव शरीर का यह महत्वपूर्ण अंग बाहरी पर्यावरणीय कारकों, बीमारियों एवं दवाओं और नकारात्मक विचारों के कारण धीरे धीरे बीमार हो जाता है। उन्होंने वायु प्रदूषण, मच्छरों,अच्छी तरह साफ़ न की गई एवं बिना पकी सब्जियों और आवारा कुत्तों को हमारे मस्तिष्क के लिए बाहरी खतरों के रूप में वर्णित किया क्योंकि ये कारक न केवल विभिन्न बीमारियों का कारण बन सकते हैं, बल्कि न्यूरोलॉजिकल सिस्टम को भी प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दवाओं का सेवन निर्धारित मात्रा में और एक निश्चित उद्देश्य के लिए करना चाहिए अन्यथा इसके दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

डॉ. कौल कहा कि सड़क दुर्घटनाओं, ब्रेन स्ट्रोक और दिमागी पागलपन के कारण हो रही न्यूरोलॉजिकल डिसेबिलिटी एक छिपी हुई महामारी है क्योंकि हर मिनट में 11 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर जाते हैं और सालाना लाखों लोग ब्रेन स्ट्रोक से पीड़ित होते हैं। उन्होंने सलाह दी कि गाड़ीचलाते समय सीट बेल्ट/हेलमेट पहने, मोबाइल फोन का उपयोग करने से बचें और नशे एवं नींद की स्थिति में कभी भी गाड़ी न चलाएं। उन्होंने बताया कि एन.आई.एम.एस. अस्पताल, हैदराबाद के स्ट्रोक रजिस्ट्री के रिकॉर्ड के अनुसार हाइपरटेंशन, डायबिटीज, धूम्रपान, हाई लिपिड, लंबे समय तक इन्फेक्शन को ब्रेन स्ट्रोक के उच्च जोखिम वाले कारकों के रूप में मान्यता दी है और यह सुझाव दिया है कि व्यक्ति को इन कारकों पर नियंत्रण करने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन में आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दिमागी पागलपन (डिमेंशिया)बीमारी किसी व्यक्ति की स्मृति शक्ति और समस्या को सुलझाने की क्षमता की कमी है, जो स्मरण शक्ति के धीरे-धीरे कम होने के साथ हमारे शरीर में शुरू होती है और एक से दो दशकों की अवधि के साथ तीव्र हो जाती है। उन्होंने जोर दिया कि इन न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से बचने के लिए, हमें नियमित व्यायाम करना चाहिए, गतिहीन जीवन शैली से बचना चाहिए और एक स्वस्थ आहार दिनचर्या का पालन करके अपने मस्तिष्क को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखना चाहिए।

वेबिनार के अंत में कुलसचिव श्री कंवल पाल सिंह मुंदरा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन दिया। इस वेबिनार में विश्वविद्यालय के संकाय, प्रशासक और छात्रों ने भाग लिया।

All Time Favorite

Categories