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नारनौल-कनीना की तरफ  जाने वाले मार्ग की भोजावास टी प्वांइट तक हालत खस्ता

नारनौल-कनीना की तरफ  जाने वाले मार्ग की भोजावास टी प्वांइट तक हालत खस्ता

नारनौल-कनीना मार्ग पर स्थित गांव सिहमा के पास टूटी सडक़ से बचकर जाते दो पहिया वाहन चालक व सडक़ से गुजरता ओवरलोड ट्रक।

टूटी सडक़ से दर्जनों गांवों के हजारों लोग परेशान, ग्रामीण में रोष
बी.एल. वर्मा द्वारा :
नारनौल, 13दिसम्बर,2019:जिला मुख्यालय से सिहमा होते हुए कनीना को जाने वाला सडक़ मार्ग बेहद खराब अवस्था में होने से जहां वाहन चालक परेशान हैं, वहीं इस मार्ग से ओवरलोड डंपर गुजरने से इस रूट के ग्रामीण खासे तंग हैं। जब इस टूटे-फूटे रोड पर कोई डंपर या अन्य भारी वाहन के पीछे चल रहे वाहन को साइड नहीं मिल पाती है और उसके पीछे रंगते हुए चलना पड़ रहा है। इस मार्ग से वाहनों के आते-जाते वक्त भारी मात्रा में धूल उड़ती रहती है और हालात इतने खराब हैं कि दुपहिया वाहन चालकों को हमेशा हादसों का खतरा बना रहता है। इसको लेकर इस रूट के ग्रामीणों में भारी रोष है।
नारनौल से जब सिहमा होते हुए कनीना की तरफ  जाते हैं तो सबसे पहले लहरोदा पार करते हुए ऑयल मील के पास नारनौल-महेंद्रगढ़ रोड टूटा हुआ है और इसमें लंबे-चौड़े गड्ढे बने हुए हैं। जबकि यह हिस्सा नारनौल-महेंद्रगढ़ फोरलेन मार्ग का है, लेकिन इस तरफ  कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। गांव खामपुर, खासपुर से सिहमा तक की सडक़ की हालत इतनी दयनीय बनी है कि उसमें सडक़ के नामोंनिशान तक मिट चुके हैं। यहां वाहनों के चलते वक्त भारी मात्रा में धूल उड़ती रहती है। गड्ढे ही गड्ढे होने के कारण वाहनों के पलटने का भी खतरा बना रहता है। इस कारण वाहन निर्धारित गति से चलने की बजाए रेंग-रेंग कर चलते नजर आते हैं। इससे आगे सुंदरह, बेवल, नांगल मोहन आदि में भी इस सडक़ मार्ग का बुरा हाल है। यह सडक़ आगे चलकर भोजावास गांव के टी-प्वाइंट में मिलती है। टी-प्वाइंट अटेली-कनीना मार्ग पर भोजावास में बनाया गया है। सिहमा वाली सडक़ की तुलना में अटेली-कनीना मार्ग बेहद चकाचक बनाया हुआ है, जबकि सिहमा रोड पर चलते वक्त वाहन चालकों को रोना आता है। इस लगभग 20 किलोमीटर के दायरे में सडक़ के नवीनीकरण की आवश्यकता है, मगर हालात बेहद खराब होने के बावजूद लंबे समय से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
छात्र नहीं पहुंच पाते है समय पर स्कूल कालेजों में:

नारनौल-कनीना की तरफ  जाने वाले मार्ग की भोजावास टी प्वांइट तक हालत खस्ता
इस रूट से सैकड़ों छात्र-छात्राएं रोजाना कनीना व नारनौल कालेज एवं स्कूल आते-जाते हैं, लेकिन वे टूटी सडक़ के कारण कभी भी समय पर नहीं पहुंच पाते हैं। इस कारण उनके एक से दो पीरियड छूट जाते हैं और उनकी पढ़ाई बाधित हो जाती है। समय भी आवागमन में ज्यादा खर्च होने से पढ़ाई को पर्याप्त समय नहीं बच पाता है।
बेहद खराब सडक़ के कारण वाहन रेंग-रेंग कर चलते हैं और यदि कहीं किसी मरीज या घायल की जान जोखिम में हो तो एंबुलेंस भी उन्हें समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाती है। यही हाल फायर ब्रिगेड का भी है। यदि कहीं आग लग जाए तो टूटी सडक़ में फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी समय पर नहीं पहुंच पाती है। इन्हीं अनेक कारणों के चलते इस रूट के ग्रामीणों में भारी रोष पनपने लगा है और वे लामबंद होने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि उनका गुस्सा कभी भी प्रशासन एवं सरकार पर फूट सकता है।
क्या कहना है इस रूट से गुजरने वाले लोगों का:
इस संबंध में इस रूट पर रोजाना आवागमन करने वाले लोगों का कहना है कि सिहमा मार्ग से सडक़ मार्ग से ओवरलोड डंपर चलते हैं और यह सडक़ मानसून सीजन में ही टूट गई थी। तब से अब तक विभाग ने इसकी मरम्मत तक नहीं की। जिस कारण इसमें लंबे.चौड़े गड्ढे बन गए हैं। इस सडक़ पर चलते वक्त हमेशा हादसों का भय बना रहता है। नारनौल से कनीना को जोडऩे वाला यह मुख्य मार्ग है। मगर प्रशासन द्वारा लगातार उपेक्षा की जा रही है। टूटी सडक़ से वाहन चलने पर दिन-रात धूल उड़ती रहती है। गांवों में जहां टूटी सडक़ है, वहां धूल से लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। लोग सांस एवं एलर्जी से परेशान है और उनकी जान पर जोखिम मंडराता जा रहा है, लेकिन सडक़ का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा। उन्होंने बताया कि प्रशासन को चाहिए कि वह इस रूट से चलने वाले ओवरलोड डंपरों के आवागमन पर लगाम लगाए। इनके कारण न केवल यह सडक़ टूटी है, बल्कि हमेशा हादसों का भी खतरा बना रहता है। जब ये सडक़ पर चलते हैं तो किसी को साइड नहीं देते और बड़ी खतरनाक ढंग से चलाते हैं।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के कार्यकारिणी अभियंता का कहना है कि इस सडक़ मार्ग का प्रपोजल बनाकर विभाग को मंजूरी के लिए भेजा हुआ है। इसके जल्द स्वीकृत होने की उम्मीद है। जैसे ही अनुमति मिलेगी, सडक़ के टेंडर जारी कर इसका निर्माण कराया जाएगा।

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