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दुर्गा स्तुति

 

दुर्गा स्तुति

 

सारे जग की पालनकर्ता,
विनती करता बारंबार,
ओ श्रद्धा की देवी माता,
चरणों में करता नमस्कार।

तेरी कृपा से ब्रह्मांड घूमता,
नभ पर सजते सूरज चंदा,
धरती के हर कण कण में,
तेरा छाया रहता चमत्कार।
सत्य स्वरूपा अष्टभुजी माँ,
जग का करती कल्याण,
तेरी कृपा दृष्टि का सब पर,
निर्मल विशुद्ध बहता प्यार।

धूप दीप नैवेद्य सजाकर,
नित आरती तेरी उतारू माँ,
अभिलाषाएं सब पूर्ण होती,
धन वैभव रहता अपरंपार।
क्षमा करो अपराध हमारे,
हम हैं अबोध अज्ञानी,
श्रद्धा सुमन है तुम्हें समर्पित,
सिमरन तेरा करता हर बार।

मां की ममता बच्चों पर तो,
सदा बरसती रहती है,
सबकी मुरादें पूरी करना,
और हरदम बरसाना उपकार।

मेरे जीवन की नैया को,
भव सागर से  पार करो माँ,
धरा पर आकर दर्शन देना,
सुनकर मेरी करुणा पुकार।
सारे जग की पालनकर्ता,
विनती करता बारंबार,
ओ श्रद्धा की देवी माता,
चरणों में करता नमस्कार।

कमल
जालंधर

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