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टीबी मरीज की जानकारी छुपाने पर दोषी जुर्माना व सजा का हकदार

टीबी मरीज की जानकारी छुपाने पर दोषी जुर्माना व सजा का हकदार
-डीसी ने ली जिला टीबी फोरम व विभागीय बैठक
-हर टीबी के मरीज को प्रतिमाह पोषण के लिए 500 रुपए
-निजी चिकित्सक को टीबी केस नोटिफाई करने पर 500 रुपए

नारनौल,27जनवरी :अगर कोई चिकित्सक, प्रयोगशाला संचालक या दवा विक्रेता टीबी के मरीजों की सूचना छिपाता है तो वह आईपीसी की धारा 269 व 270 के तहत दोषी माना जाएगा। ऐसा करने पर जुर्माना व 6 माह से 2 साल तक की सजा का प्रावधान है। स्वास्थ्य विभाग यह सुनिश्चित करें कि कोई भी चिकित्सक इस सूचना को न छिपाए। ये निर्देश उपायुक्त अजय कुमार ने आज लघु सचिवालय के मीटिंग हॉल में जिला टीबी फोरम व विभागीय बैठक मेंं दिए।
इस बैठक मेंं भारत सरकार के टीबी के उन्मूलन कार्यक्रम पर चर्चा हुई। आज की बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के संबध मे प्रस्तुत चुनौतियों एवं सरकार की कार्य योजना पर संबंधित विभाग के अनुमोदित सदस्यों के साथ विचार विमर्श करना था। सिविल सर्जन अशोक कुमार ने टीबी की बीमारी, टीबी के लक्षण, बचाव, जांच, डॉटस प्रणालीए टीबी का संपूर्ण मुफ्त इलाज के बार बारे मे विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निजी चिकित्सक को प्रत्येक टीबी केस नोटिफाई करने पर 500 रुपए व उस मरीज को ठीक करके उसकी सूचना देने पर 500 रूपए दिय जाएंगे। जिला महेन्द्रगढ़ मे वर्ष 2020-21 मे 1555 टीबी के मरीज हैं। इनका इलाज अभी भी चल रहा है। इन टीबी मरीजों में से 1491 लोगों की एच.आई.वी. व शूगर जांच की गई।
जिला क्षयरोग अधिकारी डा. हर्ष चौहान ने टीबी पोषण योजना के बारे मे बताया कि हर टीबी के मरीज को प्रतिमाह पोषण के लिए 500 रुपए दिए जाते है व 1000 रुपए इलाज सहायक को प्रोत्साहन राशि व 5000 रुपए एमडीआर व टीबी के इलाज सहायक को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इसके अलावा वर्ष 2020 में लगभग 30 लाख रूपए टीबी मरीजों को पोषण व प्रोत्साहन के रूप दिए जा चुके है। लोगों को टीबी के बारे में जागरूक करने के लिए समय-समय पर ग्राम सभा, निक्षय दिवस आदि आयोजन किया जा रहा है। डा. अजय ग्रोवर चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि टीबी बीमारी शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है व इस बीमारी का इलाज केवल डॉटस प्रणाली से संभव है। स्वास्थ्य केन्द्रों मेंं आशा वर्कर द्वारा बलगम ले कर मरीज की जांच की जाती है। प्राथमिक स्तर पर ही जांच करवाने से उपचार को कम समय मेंं हो जाता है जबकि लाहपवाही बरतने पर मरीज को भी दवाईयों का अधिक सेवन करना पड़ता है। इसके उपचार के लिए दवाईयों का निरंतर व समय पर सेवन करना अनिवार्य है।
इस अवसर पर अतिरिक्त अतिरिक्त उपायुक्त अभिषेक मीणा, नगराधीश अमित कुमार, आरटी विजेंद्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी लता शर्मा, स्वास्थ्य विभाग से डाक्टर, विभिन्न एनजीओ व अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।( बी.एल. वर्मा )

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