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ज़िंदगी 

ज़िंदगी 
ज़शीश झुका देने से अभिमान निकल जाता है
पलकें  भिगो  लेने से  पत्थर पिघल जाता है
इच्छाओं  से जरा बाहर निकल कर तो देखो
जिव्हा विराम से गमे कारवां निकल जाता है
न रखो कोई नाराजगी दिल को साफ रखना,
 होसके तो  अपने से   सभी को   माफ करना,
बिखेर  दो खुशियां  चारों तरफ मोहब्बत की,
अपने हर  करम में  हमेशा ही इंसाफ रखना।
इंसानियत  के  बिना  इंसान  अधूरा  रहता है
उसके   जीवन   का हर काम  अधूरा रहता है
प्रतिष्ठा  यश   सम्मान   उसी को   मिलता है
जो   शराफत   की  तराजू  खरा  उतरता  है।
बुद्धिमत्ता   इंसान   को अमीर   बना   देती हैं
प्रेम   और   विश्वास   जमीर   बना  देती  हैं
हंसी से  बढ़िया दवा  कोई  नहीं है दुनिया में
दया समर्पण प्रीत तो खुशनसीब बना देती है
कमल 
जालंधर

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SK Vyas

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