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“गाँधी और गाँधीवाद यानी अहिंसा और उनकी असफल राजनीति”  

"गाँधी और गाँधीवाद यानी अहिंसा और उनकी असफल राजनीति"   ********तीसरा भाग******

ऐतिहासिक घटनाओं और इतिहास पर प्रभाव डालने वाले व्यक्तित्व शून्य से नहीं बनते। उनका बाल्य काल, किशोरावस्था उनके तारुण्य, जीवन का निर्माण करती है। मुझे कुछ वर्ष पूर्व दैनिक जागरण में छपे एक समाचार का स्मरण आ रहा है। इसके अनुसार सॉथबी’ज़ {Sotheby’s} ने गाँधी के साउथ अफ़्रीक़ा में प्रगाढ़ मित्र हरमन कलेन बाख़ को लिखे गए उनके कई पत्रों को नीलाम किया था।

इन पत्रों को तत्कालीन भारत सरकार ने ख़रीद लिया था और संभवतः नष्ट कर दिया।इस विशिष्ट मैत्री प्रसंग को जोज़ेफ़ लेलीवेल्ड ने अपनी बहुचर्चित पुस्तक ‘Great Soul: Mahatma Gandhi and His Struggle with India’ जो 2011 में छपी है, में लिखा है।

यह बहुत उत्पाती विषय था और बड़ा वबाल होने की संभावना थी अतः उन्होंने इसके प्रमाण भी एकत्र किये। यह प्रमाण गाँधी के स्वयं हरमन कलेन बाख़ को लिखे गए पत्रों से मिलते हैं। हरमन कलेन बाख़ ने भी अपने भाई को लिखे पत्रों में गाँधी का अंतरंग मित्र कह कर उल्लेख किया है। कलेन बाख़ अत्यंत धनी, तगड़े बॉडीबिल्डर और सुदर्शन व्यक्तित्व के स्वामी थे। यह मित्रता इतनी प्रगाढ़ थी कि हरमन कलेन बाख़ ने ही गाँधी को 1100 एकड़ भूमि निःशुल्क दी। जिस पर उन्होंने टॉलस्टॉय फार्म बनाया।

आइये इस पुस्तक के विवास्पद प्रसंगों को जाना जाये।’Great Soul: Mahatma Gandhi and His Struggle with India’ claims that the founder of modern India had a sexual relationship with Hermann Kallenbach, a German-Jewish bodybuilder, and also made disparaging remarks about black Africans during his early years in South Africa. One criticism is Lelyveld’s use of documentary evidence and informed opinion to point to the relationship that Gandhi had developed with a Prussian architect whom the Indian playfully boasted as “having received physical training at the hands of [Eugen] Sandow [the father of modern bodybuilding”. Lelyveld’s inquiry includes quotes from a letter sent by Gandhi to Kallenbach from London in 1909: “Your portrait (the only one) stands on my mantelpiece in the bedroom. The mantelpiece is opposite to the bed… [The purpose of which, is to show to you and me how completely you have taken possession of my body. This is slavery with a vengeance.”. Later, the Indian government bought several personal letters. He also quotes cultural historian Tridip Suhrud, who says Gandhi and Kallenbach “were a couple”.

मेरे मुँह में ख़ाक, मैं यह कल्पना भी नहीं कर सकता कि गाँधी जिन्हें कांग्रेस ने राष्ट्रपिता का ख़िताब दिया, ऐसे होंगे मगर यह सत्य है कि गाँधी और कलेन बाख़ एक दूसरे को अपर हाउस और लोअर हॉउस कह कर पुकारते थे।

4 वर्ष तक एक ही घर में ये अपर हाउस और लोअर हाउस साथ-साथ रहे।न न करते हुए भी मन में यह विचार तो दबे पाँव ही सही आता तो है कि दो पुरुष एक दूसरे को ‘न भूतो न भविष्यति’ ऐसा सम्बोधन क्यों देते होंगे ? ऐसे अजीब सम्बोधन इतिहास में पहले कहीं नहीं मिलते।

कम से कम मैंने नहीं पढ़े-सुने, आपने सुने हों तो बतायें।मैंने इस तरह भी सोच कर देखा कि अपने कुछ मित्रों को मन ही मन ‘अपर हाउस और लोअर हॉउस’ सोचा जाये मगर मेरी बुद्धि स्तब्ध हो गयी। बिलकुल blackout हो गया। ठन्डे पसीने आ गये। होश में लाने के लिये मेरी पत्नी ने मुँह पर छपाके मारे। चलिये मैं असफल हो गया मगर हो सकता है आप सफल हो जायें। अतः आप प्रयास कीजिये और सत्य से अवगत कराइये।बहरहाल अभी केवल इतना ही कि देश के इतने महत्वपूर्ण काल खंड में हमारे कुछ नेताओं की निर्मिति कैसी थी ? समाज उनसे क्या अपेक्षा करता था ? वह उन अपेक्षाओं पर कितना खरे उतरे ? नहीं उतरे तो क्यों ?

तुफ़ैल चतुर्वेदी 

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SK Vyas

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