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गरीब नारी और श्वान  की व्यथा

 

हौसला  हिम्मत  साहस  से  भरपूर  है  सारी,

स्वाभिमान  कर्तव्य  निष्ठा  का  नाम है नारी।

पल भर  में ही कर लेती है  पहचान सभी की,

कुदरत  ने  उसको  दी  है  जीने  की ख़ुद्दारी।

खुशबू  की तरह  महके है जीवन के सफर में,

अनमोल  खजानों  से भरी  दिल की पिटारी।

पाला  था जिसे  चाहत से उल्फत से सभी ने,
वह जान से भी ज्यादा थी माँ बाप की प्यारी

दर दर को  भटकने  को मजबूर  हुई जब से,

जिम्मेदारियों की गठरी सर पे रख ली भारी।

पाला था  जिसे  प्यार  से बच्चों  की तरह से,

चाहता  था मिल जाए  उसे कांधे की सवारी।

पूर्व जन्म का कोई नाता  न जाने उससे कैसा,
उसने भी न  कभी भारी पड़ने दी  थी लाचारी।

जब  अपनों ने  ही बेगाना उसे मान लिया था,

संघर्षों से लोहा लेने की फिर कर ली तैयारी।

जलते थे  कभी पांव  चुभे  कांटे  कभी कंकर,

अड़चनों  ने भी हार  मानी  देख सारी तैयारी।

प्रेम त्याग तपस्या  बलिदान के गहने थे पहने,
आत्म गौरव के बने  महल की तू राजकुमारी।

गरीब नारी और श्वान  की व्यथा कमल,जालंधर

 

 

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SK Vyas

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