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कृषि कानून – आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा

कृषि कानून - आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा                                                                                                                      कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। हमारे लगभग 70 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए कृषि और अन्य संबंधित गतिविधियों पर निर्भर हैं। यदि हमारे किसान अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने और साथ ही अपने बच्चों की आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हैं तो हम एक जीवंत और आत्मनिर्भर भारत का सपना नहीं देख सकते। स्वतंत्रता से लेकर अब तककिसानों की भलाई के लिए व्यापक रूप से विचारविमर्श किया गया है और हमेशा उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से कुछ नीतिगत पहलों का पालन किया गया है। जब से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का गठन हुआ हैतब से किसानों के कल्याण का मुद्दा केंद्र बिंदु बना हुआ है। अगर सामान्य रूप से निष्पक्ष तौर पर वर्तमान व्यवस्था को तथा विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देखा जाएतो किसानों के लिए नीतियों में पूर्ण स्पष्टता हैजो कि उनके समग्र विकास का लक्ष्य है। यद्यपि हमारे जैसे जीवंत लोकतंत्र में विचारों की भिन्नता स्वाभाविक है परन्तु किसी को सबसे ज्यादा यह बात परेशान करती हैकि यदि कुछ अच्छा हो रहा है तो वह उसे स्वीकार करने को तैयार नहींजैसे कि लंबे समय से भारी परेशानियों का सामना कर रहेहमारी आशा के अग्रदूतकिसानों की सहायता करने के उद्देश्य से तैयार किये गए कृषि कानून।

किसानों का कल्याण सीधे तौर पर उन्हें उनकी उपज से मिलने वाली कीमत से जुड़ा है कि खेती कितनी किफायती है और किसानों को अपनी उपज बेचने में कितनी स्वतंत्रता है। कई राज्यों में कुछ वर्ष पूर्वफलों और सब्जियों को कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसीअधिनियम के दायरे से बाहर लाने से बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हुए हैंजिससे उन्हें अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता मिली है जहाँ वे सर्वोत्तम मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। जिस तरह से कमीशन एजेंट और बिचौलिए हमेशा निर्दोष किसानों की तलाश कर उनका शोषण करते हैंउसे समझने की जरूरत है। वे कृषि उपज को केवल उच्च दरों पर बेचने के लिए एकदम सस्ते दाम पर खरीदते हैं। तीनों नए अधिनियमित कानूनकृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरणअधिनियम 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षणकीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधनअधिनियम 2020-किसानों के लिए त्रिगुट व हितकारी प्रोत्साहन के रूप में आते हैंजो हमारे कृषकों को लंबी अवधि तक समर्थ करने में प्रभावी होंगे और 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पिछले कुछ वर्षों मेंएपीएमसी द्वारा नियंत्रित मंडियों में किसान अपनी उपज बेचने के लिए विवश थे और बिचौलियों के आकर्षण का केंद्र भी। कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरणअधिनियम 2020 का उद्देश्य एपीएमसी द्वारा विनियमित मंडियों के बाहर कृषि उपज की बिक्री की अनुमति देना है। कृषक (सशक्तिकरण  संरक्षणकी मत आश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम 2020 अनुबंध पर खेती का अवसर प्रदान करता हैजबकि आवश्यक वस्तु (संशोधनअधिनियम, 2020 अनाजदालआलूप्याज और खाद्य तिलहन जैसे खाद्य पदार्थों के उत्पादन,आपूर्ति व वितरण को नियंत्रण मुक्त करता है। ये कानून किसानों को प्रतिकूल मूल्य विविधताओं के खिलाफ संविदात्मक संरक्षण प्रदान करते हैं और उन्हें अनुकूल बाजार मूल्यों का लाभ उठाने की स्वतंत्रता भी देते हैं। किसानों को अब सही कीमत परसही समय और सही जगह पर अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता के साथ अधिकार दिया गया है।

किसानों को उनकी उपज के लिए पारिश्रमिक मूल्य मिले और उनकी आय और आजीविका की स्थिति में वृद्धि होयह सुनिश्चित किए बिनाएक आत्मनिर्भर भारत के विचार को एक स्थायी वास्तविकता में नहीं बदला जा सकता। हमें एक पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है जहां किसानों और व्यापारियों को उनकी पसंद के कृषि उत्पादों की बिक्री और खरीद की स्वतंत्रता प्राप्त होजैसी गारंटी कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरणअधिनियम 2020 के प्रावधानों के तहत दी गयी है। यह राज्य कृषि उपज विपणन कानून के तहत अधिसूचित बाजारों के भौतिक परिसर के बाहर अवरोध मुक्त इंटरस्टेट और इंट्रास्टेट व्यापार और वाणिज्य को भी बढ़ावा देता है। किसानों को उनकी उपज की बिक्री के लिए कोई उपकर या लगान नहीं लिया जाएगा और उन्हें परिवहन लागत वहन नहीं करनी होगी। इलेक्ट्रॉनिक रूप से निर्बाध व्यापार सुनिश्चित करने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक व्यापार मंच होगा। किसान प्रत्यक्ष विपणन में खुद को सम्मिलित करने में सक्षम होंगेजिससे बिचौलियों को समाप्त किया जा सकेगाजिसके परिणामस्वरूप मूल्य की पूर्ण वसूली हो सकेगी।

इसी प्रकारकृषक (सशक्तिकरण  संरक्षणकी मत आश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम 2020,  जमीनी स्तर पर किसानों को प्रोसेसरथोक व्यापारी, एग्रीगेटरथोक व्यापारीबड़े खुदरा विक्रेताओंनिर्यातकोंआदि के साथ शामिल करने के लिए सशक्त बनाता है। यह फसलों की बुवाई से पहले ही किसानों को मूल्य आश्वासन प्रदान करता है। अधिक बाजार मूल्य के मामले मेंकिसान न्यूनतम मूल्य के अतिरिक्त इस मूल्य के हकदार होंगे। यह किसान से प्रायोजक की ओर बाजार की अनिश्चितता के जोखिम को स्थानांतरित करेगा। पूर्व मूल्य निर्धारण के कारणकिसानों को बाजार की कीमतों के बढ़ने और गिरने से बचा लिया जाएगा। यह किसान को आधुनिक तकनीकबेहतर बीज और अन्य इनपुट का उपयोग करने में भी सक्षम बनाएगा। यह विपणन की लागत को कम करेगा और किसानों की आय में सुधार करेगा। आवश्यक वस्तु (संशोधनअधिनियम, 2020 अनाजदालआलूप्याज और खाद्य तिलहन जैसे खाद्य पदार्थों के उत्पादनआपूर्ति और वितरण को नियंत्रण मुक्त करता है।

नए विधानों ने वित्तीय लाभ कमाने के लिए कई रास्ते खोल दिए हैं। इनसे तीन दिनों के भीतर भुगतान प्राप्त होगा। पूरे देश में दस हजार किसान उत्पादक संगठन (एफपीओबनाए जा रहे हैं। ये एफपीओ छोटे किसानों को एक साथ लाएंगे और कृषि उपज के लिए पारिश्रमिक मूल्य सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे। अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बादकिसानों को व्यापारियों की तलाश नहीं करनी होगी। क्रय उपभोक्ता सीधे खेत से उपज उठाएगा। विवाद की स्थिति मेंबारबार न्यायालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। जहां तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपीका सवाल हैकेंद्र ने स्पष्ट किया है कि किसानों के पास सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर अपनी उपज बेचने का विकल्प होगा। मंडियां काम करना बंद नहीं करेंगी और व्यापार पहले की तरह जारी रहेगा। मंडियों में ईनाम ट्रेडिंग सिस्टम भी जारी रहेगा। इलेक्ट्रॉनिक मंच पर कृषि उपज में व्यापार बढ़ेगाजिसके परिणामस्वरूप अधिक पारदर्शिता और समय की बचत होगी।

किसानों को भयमुक्त करने के लिए, कृषि कानून - आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेकों बार दोहराया है कि खेत बाजार बंद नहीं होंगे और ये पहले की तरह ही काम करते रहेंगे। उन्होंने देश के प्रत्येक किसान को यह भी आश्वासन दिया है कि एमएसपी की प्रणाली पहले की तरह जारी रहेगी। इस साल रबी सीजन मेंकिसानों को गेहूंअनाजदलहन और तिलहन की खरीद के लिए एमएसपी में 1.13 लाख करोड़ रुपये दिए गएजो पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। भारत में 85 प्रतिशत से अधिक छोटे या सीमांत किसान हैं। इसके परिणामस्वरूपउनकी उत्पादक सामग्री की लागत बढ़ जाती है और कम उत्पादन के कारण वे मुनाफा भी नहीं कमा पाते हैं। प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा है कि अगर किसान संघ बना सकते हैंतो वे बेहतर निवेश और लाभ सुनिश्चित कर सकते हैं। वे खरीदारों के साथ बेहतर अनुबंध कर सकते हैं। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 2020 में सुधारों के सन्दर्भ मेंअब देश के किसान बड़ी मात्रा में अपनी उपज को ठंडे गोदामों में आसानी से जमा कर सकते हैं। जब भंडारण से संबंधित कानूनी समस्याएं दूर हो जाएगीतब कोल्ड स्टोरेज का नेटवर्क भी विकसित होगा और आगे बढ़ेगा। यह समय है कि हम किसानों को आधुनिक सोच के साथ देखें और उन्हें आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अधिक तरीकों से खुद को सशक्त बनाने में मदद करें।

*राजीव रंजन रॉय :  ( *लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। व्यक्त किए गए विचार व्यक्तिगत हैं। )

                                                                                                            

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