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कथित किसान नेताओं की खुल गई पोलl* : *रमन मलिक*

कथित किसान नेताओं की खुल गई पोलl* : *रमन मलिक*

*गुरुग्राम*–जिस प्रकार आज दिल्ली के अंदर कथित किसान रैली के नाम पर गुंडई और भारत विरोधी शक्तियों ने अपना क्रूर रूप दिखायाl  उसकी जितनी भी फसना और निंदा करी जाए कम हैl
वही मैं दिल्ली पुलिस को साधुवाद देता हूं कि उन्होंने परिस्थिति को बड़ी शांति पूर्वक और संयम से संभाला हालांकि बहुत सारे लोगों का यह मानना है कि दिल्ली पुलिस ने उपद्रवियों के साथ  बड़ी नरमी से पेश आई।

जहां सरकार ने किसान नेताओं की बात को बड़ा करते हुए दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च की इजाजत दी, वहीं आज का दिन भारत के इतिहास में दुर्भाग्यपूर्ण दिवस के रूप में याद करा जाएगा। कानून काले नहीं बल्कि कानूनों पर हो रही राजनीति काली है। जहां इन 40 किसान नेताओं ने सरकार को बार-बार आश्वासन दिया कि ट्रैक्टर रैली निकालने कि उनको इजाजत दी जाए और वह यह सुनिश्चित करेंगे कि यह ट्रैक्टर रैली शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहेगी।
लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण विषय है कि उन 40 के 40 नेताओं का इस ट्रेक्टर रैली में कहीं भी नामोनिशान नहीं था।  वह कहीं भी दिखाई नहीं दीये और दिल्ली की सड़कों पर आज कानून और संविधान दोनों को, द्रोपती की उस दशा में कर दिया गया, जिस प्रकार कौरवों ने चौसर खेलते अपनी दरिंदगी दिखाई थी।
आज इस देश का बुद्धिजीवी कृपाचार्य की तरह चुप क्यों है? वह लोग जो संविधान और संवैधानिक विषयों की दुहाई देते हुए इस आंदोलन को सही ठहराते थे वह धृतराष्ट्र की तरह मौन क्यों हैं?
इस देश की सभी राजनीतिक पार्टियां जो संविधान के दायरे में रहकर लोकतंत्र को मजबूत स्थापित और अधिक बनाने के लिए वचनबद्ध हैं वह आज भीष्म पितामह की तरह चुप क्यों है?
मुझे बहुत सारे लोगों का आज संदेश मिला फोन आए और वह मुझसे यह पूछते हैं कि जब कोई भी इवेंट करता है तो उसकी कानून व्यवस्था और किसी भी तरीके के जानमाल के नुकसान का जिम्मेवार उसका आयोजक होता है तो फिर यह जो 500 से ऊपर नेता हैं जो अपने आप को जत्थे बंदियों के अध्यक्ष मानते हैं यह इसके लिए क्यों नहीं जिम्मेदार?  क्या यह कह देना कि हो सकता है यह कुछ राजनीतिक लोग घुस गए हैं!  या यह कहना की जी यह हमारे लोग नहीं हैं!  क्या ऐसे वक्तव्य से इनकी जिम्मेदारी हट जाएगी? और जो किसान नेता यह कहते हैं कि यह लोग उनके नहीं हैं और किसी राजनैतिक दल के लोग हैं तो उनको यह भी स्पष्ट करना चाहिए कौन से राजनीतिक दल के यह लोग थे?
दिसंबर माह के अंत में कांग्रेस के पंजाब से सांसद बिट्टू ने बड़ी स्पष्ट रूप से बोला था कि हम अब रणनीति बदलेंगे और खून के दरिया, लाशों के ढेर लग जाए। लेकिन अब लड़ाई आर-पार की होगी।
आज भारत के सवाल पूछता है कि लाल किले के प्राचीर पर राष्ट्रध्वज की जगह कोई और ध्वज लहरा ना गुनाह नहीं है?  क्या गणतंत्र दिवस के दिन इससे बड़ा देश का अपमान हो सकता है?  उन सभी लोगों को जो आज तक एक किसान आंदोलन के लिए समर्थन दे रहे थे मैं उनसे भी सवाल आज पूछता हूं क्या आंखों में शर्म आती है जब आप ऐसा दृश्य देखते हैं?
आज हर हिंदुस्तानी का खून खोल रहा है।  सवाल बहुत अहम और बड़ा है क्या किसान के नाम पर हो रही गुंडागर्दी बर्दाश्त करी जाएगी? क्या अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय अपने आप इस विषय का संज्ञान लेते हुए इन कथित नेताओं और उनके द्वारा छोड़े गए गुंडे अभिनेताओं को कानून का सबक सिखाएगा?
केंद्र सरकार ने हर संभव कोशिश कर यह आश्वासन दिया कि एमएसपी उसी प्रकार चलती रहेगी जो बदलाव सुझाए जाएंगे उस पर काम किया जाएगा यहां तक की इन कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने का भी प्रस्ताव दिया लेकिन मंशा किसान कानून की नहीं मंशा देश का मान सम्मान धूमिल करना और अपनी राजनीति को स्थापित करना था।
हमने देश के सामने बार-बार यह जताया कि इस कथित किसान आंदोलन की आड़ में सिर्फ देश विरोधी गतिविधियां करी जाएंगी इसमें माओवादी और नक्सली अपने कार्यक्रम को अंजाम देंगे और जो विदेशी ताकतें किस्तान के दिए हुए एजेंडे को चलाना चाहते हैं वह इसका पूरा उपयोग करेंगे।
इन बातों का किसान नेताओं ने बार-बार खंडन करा लेकिन आज वह खंडन करने वाले गायब हो गए हैं।
जिस प्रकार से दिल्ली के अंदर तलवारों का प्रदर्शन कर आ गया।  जिस प्रकार खतरनाक तरीके से सुरक्षाकर्मियों के ऊपर 26 जनवरी वाले दिन ट्रैक्टरों को चलाया गया।  जिस प्रकार यह पूरा प्रकरण को आज अंजाम दिया गया वह यही दिखाता है कि इन नेताओं की मंशा किसानों का हित नहीं बल्कि देश का हित और अपनी राजनीति चमकाना था।

इन सभी अराजक तत्वों ने गणतंत्र दिवस के दिन राष्ट्रध्वज की आड़ में राष्ट्र और राष्ट्रध्वज दोनों को शर्मिंदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जहां सुरक्षाकर्मियों ने राष्ट्रध्वज का सम्मान करते हुए बड़े संयम से काम लिया वही यह लोग और इनके गायब नेता यह भूल गए की सुरक्षा कर्मियों की वर्दी पर भारत सरकार का जो चीन है वह भी इसी गणतंत्र की पहचान है जिस पर इन लोगों ने हमले करे।

YS.Rana: Principal Correspondent

yadavindras@gmail.com

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