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*एहसासों की धुरी पर*

*एहसासों की धुरी पर*

तेरा मेरा प्रीत का बंधन,
अब न हो मजबूरी पर, 
जीवन पथ पर साथ चलेंगे,
*एहसासों की धुरी पर*।

निष्ठुर दुनिया ने कब माना,
अमर प्रेम का ये बंधन,
मिल  जाएंगे  हम  दो  प्रेमी,
 प्रेम  कहानी पूरी पर।

किस्मत में क्या है लिखा,
इसकी मुझको परवाह नहीं,
नहीं रुकेगा प्रेम सफर
किसी मंजिल आधी अधूरी पर।

लंबी अक्सर हो जाती रातें,
नींद नहीं आती है जब,
मत  घबराना  तन्हाई  से
और मिलन की देरी पर।

रोशन हो जाती सभी दिशाएँ,
दिनकर के उजियारे से,
अचंभित होंगे  देखकर  सारे,
प्रेम तत्व की नूरी पर।

इंद्रधनुष  भी  खुश  होगा,
देख प्रतीति न्यारा बंधन,
छा ही जाएंगे रंग सतरंगी
तब मलमल की चुनरी पर।

सुना ही होगा सब नंगे पाँव,
दौड़े आते  उसे मिलने को,
सप्त स्वरों का राग छिड़ा
जब कान्हा की बांसुरी पर। 

तेरा मेरा प्रीत  का बंधन,
अब न  हो  मजबूरी पर,
जीवन पथ पर साथ चलेंगे,
 *  एहसासों की धुरी पर*।

*एहसासों की धुरी पर* कमल जालंधर

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