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Haryana

ईओ के स्थानांतरण के बाद शहर की बेशकीमती जमीनों पर भूमाफिया की नजर

-नगर परिषद का कार्यभार सचिव के हवाले
                                                                                       बी.एल. वर्मा द्वारा
नारनौल 6फरवरी 2019 :ईओ के स्थानांतरण के बाद शहर की बेशकीमती जमीनों पर भूमाफिया की नजर शहर की नगर परिषद की कुर्सी अब कार्यकारी विहीन हो गई है। अब नगर परिषद का कार्यभार सचिव के हवाले रहेगा। ईओ के स्थानांतरण के पीछे जहां शहर की बेशकीमती जमीनों पर भूमाफिया की नजर से बचाना एक कारण माना जा रहा है, वहीं राजनीतिक हलके में दो धुरंधरों के वर्चस्व की लड़ाई भी अहम रही है।
जानकारी के अनुसार कार्यकारी अधिकारी अभयसिंह यादव के नारनौल से रोहतक स्थानांतरण की चर्चा एक माह से बनी हुई थी। सूत्रों के अनुसार 6 जनवरी को ही तैयार सूची में उनका नाम शामिल हो गया था। उन्हें नारनौल से नूंह भेजा जाना तय था। उनके स्थान पर सत्तादल से जुड़े एक वरिष्ठ नेता के नजदीकी को लाया जाना था। तबादला सूची तैयार होने के बाद मामला पेंडिंग हो गया। इसके बाद एक पखवाड़े पहले फिर ईओ के जाने की चर्चा जोरों पर रही। आखिरकार जारी सूची में उनका नाम रोहतक के लिए आया और ईओ का जाना तय हो गया और वे सोमवार यहां से रिलीव होकर अगले पड़ाव पर रवाना हो गए।
सूत्र बताते है कि अभयसिंह के जाने के पीछे उनकी कार्यशैली और राजनीतिक लड़ाई भी कारण रही। शहर में नगर परिषद की मलकियत वाली ऐसी अनेक जमीनें हैं, जिन पर भूमाफिया की अर्से से नजर है। नई परिषद केे गठन के बाद उन पर कब्जा होने की चर्चाएं जोरों पर चली। अनेक बार नगर परिषद की आमसभा की बैठक में इनकी पहचान करके इन पर तारबंदी करवाने का मामला पार्षदों ने उठाया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस संबंध में ईओ ने अनेक बार अपने मातहत अधिकारियों को तारबंदी करवाने के लिए पत्र भी लिखे। सूत्रों के अनुसार 21 मई 2018 को संबंधित एमई को पत्र क्रमांक 521 के तहत अंतिम बार चेतावनी पत्र तक जारी कर दिया गया था, किंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। सूत्र बताते हैं कि ईओ के तबादले में राजनीतिक प्रतिद्वंदिता भी प्रमुख कारण रही। उन्हें राव इंद्रजीत सिंह का नजदीकी माना जाता रहा है, जबकि नगर परिषद चेयरपर्सन को राव नरबीर की नजदीकी हासिल रही है। पिछली बार उनका तबादला रुकवाने में इंद्रजीत कैंप का हाथ रहा था। इस बार वे ऐसा नहीं कर पाए।
सूत्र बताते हैं कि ईओ के नारनौल से स्थानांतरण के लिए जिले के 2 विधायकों की सिफारिश होने के कारण राव कैंप ज्यादा प्रयास नहीं कर पाया। इनमें से एक विधायक के चहेते के नारनौल आने की संभावना को देखते हुए ईओ ने भी जाना मुनासिब समझा। उनके जाने के बाद संभावना है कि नगर परिषद अपनी मलकियत वाली उन 60 से ज्यादा जमीनों की लीज को और ज्यादा समय के लिए आगे बढ़ा दे, जिसे पिछले एक साल से प्रयास के बाद भी बढ़ाया नहीं जा सका था। इनमें से एक करोड़ों रुपए कीमत वाली एक जमीन की रघुनाथपुरा पहाड़ी के नजदीक वाली लीज का मामला भी है। जिसे पिछली तीन बैठकों में पास करवाने के किए गए अनेक प्रयास नाकाम रहे।

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