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-“आधा अधूरा चाँद”*

-"आधा अधूरा चाँद"*

न जाने क्यूँ बरबस तड़पाती मुझे तुम्हारी याद

जब जब देखूं नील गगन में आधा अधूरा चांद

शर्माता सा कभी निकलता बन कजरे कीधार

 

मेरे  मन  का सूना  आंगन  कर  देता आबाद।

हर दिन तेरा क्रमशःबढ़ना छठा अमोलक

तेरी सोलह  कलाओं  से संपूर्ण रहता है आजाद।

अनुपम  दिव्य स्वरुप आत्म प्रकाश कर देता,
अमृत जल की वर्षा करता तेरा जीवन नाबाद

 

तुमसे दिल की बातें करके निकले सारी रात

, अंतर्मन की ज्वाला मिटती और हटताअवसाद

तेरा सुंदर रूप सलोना मेरे जीवन को महकाए

देख  तुझे हर पूरी हो जाए  मन की मेरी मुराद

बिन तेरे  मेरा जीवन सूना नील गगन के राजा

मन मेरा बस करना चाहे हर दिन तुझसेसंवाद

मीनाक्षी
जालंधर

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