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आधा अधूरा चाँद

आधा अधूरा चाँद

आधा  अधूरा  चांद  खिले  नील  गगन  में,
कांति  का    संसार  मिले  नील  गगन में।

आरजू  है    बस  तेरा    दीदार  रोज  हो,
नित  चांदनी  के  सिलसिले  नील  गगन में।

सोलह    कलाओं  से  संपूर्ण  तेरा  स्वरूप,
नूरानी    रंग  सा    दिखे    नील  गगन  में।

दिन सा उजाला करता तेरा पूर्णिमा का रूप,

जिया  देखने  को  तरसे  नील  गगन में।

तुझ  सा  हसीन  कोई  दुनिया  में  नहीं  है,
तारों  के  संग  संग  दमके  नील  गगन  में।

काली  घटाएं  देखकर न  जाने  क्यों  जले,
छुप    जाते  हो  डर    के  नील  गगन  में।

मोहब्बत  सी  हो गई  है  बस  देखकर  तुम्हें,
मन  बन  चकोर    निहारे  नील  गगन  में।

कमल
जालंधर

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