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अभिमान

अभिमान

क्षणभंगुर  है    जीवन  अपना
काहे  करता  इतना  अभिमान
धन दौलत  और  महल खजाने
सब  के  सब  है  झूठी शान
ऐसा  जीवन किस  काम का है
जीते  जी जो  काम  ना  आए
हो  पाए  तो  बस  इतना करना
हर    जन      पाए    मुस्कान।

स्वाभिमान  से  जीवन  जीना
कभी  ना  झूठी शान  दिखाना
अपना  हो या  कोई भी बेगाना
सब  पर  अपना  प्रेम  लुटाना
सारा  जग  फिर  नाम तुम्हारा
ही    हर    पल      दोहराएगा
देने  से  नहीं    घटती  दौलत
बस  देते  रहना  प्रेम खजाना।

हम  सब भारत  देश के वासी
तिरंगा    अपना  अभिमान  है
विभिन्न बोलियों  जातियों  से
बनती  अपनी    पहचान    है
उत्तर  दक्षिण  पूर्व  पश्चिम
सबको  ही  भारत  प्यारा  है
एक तंत्र  से  सभी  को  बांधे
भारत    का    संविधान  है।

पूजनीय    है यह  धरती  माता
लेते    भगवान  अवतार  जहां
जब-जब  धर्म की  हानि  होती
खुद करने  आते हैं  उद्धार जहां
असंख्य    देवता    देवियों  का
पूजन  वंदन  नित  नित  होता
अभिमान  मुझे  इस  धरती का
हर  पल  मिलता  प्यार  यहां।
कमल
जालंधर

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