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अन्तर्राष्ट्रीय विचार गोष्ठी आयोजित

अन्तर्राष्ट्रीय विचार गोष्ठी आयोजित नारनौल,19 जनवरी,2020 :  हिंदी भारत की भौगोलिक परिधि से बाहर निकल कर पूरे विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही है, लेकिन हिंदी का साहित्य और संपर्क भाषा बनना ही पर्याप्त नहीं है।

उक्त विचार स्थानीय हुडा सेक्टर एक में स्थित अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र मनुमुक्त भवन में अन्तर्राष्ट्रीय विचार गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए संस्कृति विश्वविद्यालय मथुरा उत्तर प्रदेश के कुलपति डा. राणा सिंह ने व्यक्त किए।

श्री सिंह ने कहा कि कौशल विकास के इस युग में विज्ञान, तकनीकी और प्रौद्योगिकी से जुडक़र ही हिंदी सही अर्थ में समृद्ध भाषा बन सकती है। पत्रकार डा. सुरेशचंद्र शुक्ल ने हिंदी को विश्व की संपर्क भाषा बताते हुए कहा कि यह एक करोड़ प्रवासी भारतीयों के माध्यम से विश्व को भारत और भारतीय संस्कृति से जोडऩे का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। सिंघानिया विश्वविद्यालय पचेरी बड़ी राजस्थान के कुलपति डा. उमाशंकर यादव ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि हिंदी मात्र भाषा नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति की संवाहक भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदी को जाने बिना भारत की 5000 वर्ष पुरानी संस्कृति को समझना संभव नहीं है।

संजय पाठक द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना गीत के उपरांत चीफ  ट्रस्टी डा. रामनिवास मानव के प्रेरक सानिध्य तथा डा. पंकज गौड़ के कुशल संचालन में संपन्न हुई। विचार गोष्ठी में नौसॉरी की सुएतादत्त चौधरी, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान आगरा के प्रोफेसर डा. दिग्विजय शर्मा, अलवर के वरिष्ठ कवि संजय पाठक, महिला महाविद्यालय भीटेडा राजस्थान के प्राचार्य डा. सुमेर सिंह यादव, नरगिस सुल्ताना, आगरा उत्तर प्रदेश के डा. दिग्विजय शर्मा, विपिन शर्मा, महेंद्र सिंह गौड़, बी.एस. यादव, दुलीचंद शर्मा, डा. जितेंद्र भारद्वाज, सुबेसिंह यादव, राजेश कुमार शर्मा, किशन लाल शर्मा, परमानन्द दीवान, नंदलाल खामपुरा, राधेश्याम गोमला, डा. कांता भारती, कृष्ण कुमार शर्मा, बनवारीलाल शर्मा आदि नागरिकों उपस्थित थे।

बी.एल. वर्मा द्वारा

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